3 अक्टूबर 2020 - 17:02
कुवैत के अमीर की मौत और ज़ायोनी शासन के साथ संबंध स्थापना का मामला

क्या कुवैत के नए अमीर, पिछले शासक की तरह, ज़ायोनी शासन के साथ संबंध स्थापना का विरोध करेंगे?

संयुक्त अरब इमारात और बहरैन की ओर से इस्राईल के साथ संबंध स्थापना के समझौते की घोषणा के बाद जिन देशों ने इस समझौते का विरोध किया था उनमें से एक कुवैत भी था और ज़ाहिर सी बात है कि इस फ़ैसले में कुवैत के अमीर की अहम भूमिका थी। शैख़ सबाह अलअहमद अस्सबाह ने, जिनका मंगलवार को निधन हो गया, ज़ायोनी शासन के साथ कुछ अरब देशों के संबंध स्थापित करने के बारे में मीडिया लहर और अमरीका के भारी दबाव के बावजूद, इस समझौते का विरोध किया था और कुवैत की सरकार ने औपचारिक रूप से इसकी घोषणा भी की थी।

 

इस स्पष्ट घोषणा ने अरबों व तेल अवीव के संबंधों की स्थापना को अटल बताने की अमरीका व ज़ायोनी शासन के राजनैतिक व प्रचारिक हलक़ों की सभी कोशिशों को नाकाम बना दिया था। वाॅल स्ट्रीट जरनल की रिपोर्ट के मुताबिक़ ट्रम्प ने सितम्बर महीने की शुरुआत में शैख़ सबाह के सबसे बड़े बेटे से वाइट हाउस में मुलाक़ात के बाद, जो कुवैत के पूर्व रक्षा मंत्री और युवराज के पद के सबसे सशक्त दावेदार हैं, कहा था कि कुवैत वह अगला देश होगा जो इस्राईल से औपचारिक रूप से संबंध स्थापित करेगा। लेकिन कुवैत के प्रधानमंत्री ने एक हफ़्ते बाद ही संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के वार्षिक अधिवेशन में खुल कर कहा कि उनका देश ज़ायोनी शासन के साथ संबंध स्थापना का विरोधी है।

 

अहम बात यह है कि वाॅल स्ट्रीट जरनल ने सूचना दी है कि कुवैत के अमीर के निधन के बाद इस देश पर इस्राईल के साथ संबंध स्थापित करने के लिए दबाव पड़ रहा है। पत्र ने एक रिपोर्ट में लिखा है कि कुवैत दशकों से मध्यपूर्व के क्षेत्र में अनियंत्रित विवादों के बारे में निष्पक्ष नीतियां अपनाता रहा है लेकिन इस देश के शासक की मौत ने उनके उत्तराधिकारी को कठिन दोराहे पर खड़ा कर दिया है और वह  यह है कि कुवैत एक स्वाधीन फ़िलिस्तीनी देश के बने बिना ही इस्राईल के साथ संबंध स्थापित कर ले या नहीं। इस भूमिका पर ध्यान देते हुए यह सवाल पैदा होता है कि क्या अमरीका व इस्राईल, कुवैत के अमीर को अरबों व इस्राईल के बीच संबंध स्थापना की राह का सबसे बड़ा रोड़ा समझते थे और अब उनके निधन के बाद नए अमीर को इस्राईल से संबंध स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने में अपने हाथों को अधिक खुला महसूस कर रहे हैं?

 

कुवैत की संसद ने मंगलवार को इस देश के युवराज शैख़ नुवाफ़ अलअहमद अस्सबाह की देश के नए अमीर के रूप में पुष्टि कर दी और पिछले अमीर के निधन के कारण देश में चालीस दिन के शोक की घोषणा की। वाॅल स्ट्रीट जरनल ने कुवैत के शाही परिवार के एक वरिष्ठ सदस्य के हवाले से बताया है कि संभावित रूप से सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात, कुवैत पर दबाव डालने की कोशिश करेंगे ताकि उन क्षेत्रीय मामलों में, जिनमें शैख़ सबाह निष्पक्ष रहते थे, कुवैत को अपने मर्ज़ी के मुताबिक़ चलने पर विवश कर दें। अलबत्ता उक्त सदस्य का कहना है कि पिछले अमीर के फ़ैसलों में नए अमीर की अहम भूमिका होती थी वे इस्राईल के साथ एकपक्षीय रूप से संबंध स्थापित करने का समर्थन नहीं करेंगे। शाही परिवार के उक्त सदस्य का कहना है कि कुवैत निष्पक्ष रहना चाहता है, हम न तो वर्तमान स्थिति का स्वागत करते हैं और न ही उसकी आलोचना करते हैं। बहरहाल कुवैत के नए अमीर इन बातों का किस हद तक पालन करते हैं, इसे जानने के लिए प्रतीक्षा करनी होगी।